ललितपुर

 प्राकृतिक सुरम्य वातावरण में पुरातात्विक धरोहर भारतीय संंस्कृति को दर्शाती हैं : फिरोज इकबाल

पर्यटन मित्र ने दर्जनों ग्रामीण अंचलों में फैले प्राकृतिक सौंदर्य को यात्रा के जरिए उकेरा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जनपद ललितपुर अपनी विविधता, संस्कृति, परम्परा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिये प्रसिद्ध है। पर्यटन मित्र फिरोज इकबाल डायमण्ड बताते हैं कि जिले के अनेकों स्थान में देवगढ़, अमझरा घाटी, बार, बछरावनी, बालाबेहट, बन्दरगुढ़ा, बानपुर, बंट, चंडीमाता मंदिर जलप्रपात, चांदपुर जहाजपुर, दशरारा, दूधई, गिरार, टेटा-जमालपुर, झूमरनाथ, करकरावल, लखन्जर, मदनपुर, माताटीला, नीलकंठेश्वर पाली, पांडववन, पवागिरी, राजघाट, रणछोरधाम, सदनशाह दरगााह, सिरोंनकलां, सिरसी, सौंरई, मडावरा, बिजरौठा, डोंगराकलां, राखपंचमपुर, तालबेहट, बुदनी, उल्दनाकलाँ हैं, जहां पुरातात्विक धरोहरों के साथ ही संस्कृति और प्राकृतिक सुरम्य वातावरण की अनुभूति प्राप्त होती है। जब लोग इन पर्यटन स्थलों को देखने जाते हैं, तो सिर्फ तस्वीरें नहीं लेते, इतिहास को जिंदा रखते हैं। पर्यटन से हमारे क्षेत्रों की विशिष्टता और पहचान विश्व पटल पर स्थापित होती है। बुन्देलखण्ड को देखने की ललक में 2 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा के बाद भी अनेको नये ज्ञात व अज्ञात स्थल आज भी अचरज में डाल देते है। ऐसे ही दुर्लभ नये और अनछुए स्थान की सैर पर ले चलते है जो अब तक लोगों की दृष्टि सेे ओझल रहा है। यह मेरी खोज पर्यटन दिवस को समर्पित है, जिसकी थीम भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा घोषित ग्रामीण और समुदाय केंद्रित पर्यटन है। पर्यटन के यह नये स्थल जो ग्रामीण क्षेत्रों में है और पर्यटन रोजगार में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते है। ललितपुर से महरौनी होते हुये सौजना तिराहे से गौना- मड़ावरा मार्ग पर कुसमाड़ से आगे तिराहे से मिलन का खैरा गांव जो कुसमाड़ से 06 किमी. दूर स्थित है पहुंच कर इस अनौखे और अद्भुत स्थान को देख सकते है। गांव में खेतों की मेड़ो से होते हुये यहां पहुंचना बड़ा रोचक है। यहां एक के ऊपर एक पत्थर जिस बैलेंस के साथ रखे हैं वह आश्चर्यचकित और अचंभित करता है। दन्त कथाओं में स्थानीय लोगों का अपना अपना मत है। कोई कहता है कि महाभारत काल में भीम जब यहां से गुजर रहे थे तो रास्ते में बिखरे तीन विशालकाय चट्टानों को उन्होने एक के ऊपर रख दिया। कुछ लोग बताते है कि आल्हा ऊदल के समयकाल में इन चट्टानों को निगरानी चौकी हेतु एक के ऊपर एक रखकर निगरानी हेतु उपयोग में लिया गया। खैर वास्तविकता हो भी हो पर इन सैकड़ो कुन्तल वजनी पथरीली चट्टानें जो बहुत ही संकीर्ण आधार कुछ वर्ग इंच पर एक पर एक रखे गये है यहां मूल पत्थर हवा में लटका सा प्रतीत होता है और आश्चर्यचकित कर देता है। समीप ही एक बड़ी चट्टान पर भी एक पत्थर भी रखा है। ऐसे प्राकृतिक स्थल का शासन प्रशासन प्रचार प्रसार करें तो निश्चित ही जनपद ललितपुर पर्यटकों के लिये पर्यटन पड़ाव होगा। आज सैकड़ो हजारों वर्षो से ये बैलेंसिंग रॉक प्राकृतिक आपदाओं को का सामना बिना गिरे कर रही है। नजदीक ही पत्थरों के कई ढेर इसे श्रंखलास्वरूप बनाते है। आसपास मौजूद खेतों में किसानी करने वाले यहां धूप से बचने के लिये यहां ठण्डी छांव में बैठ जाते हैं। ललितपुर के विशाल नदी तटीय क्षेत्र, सघन वन, वास्तुकला, ऐतिहासिक धरोहरों के गौरवशाली इतिहास को लोग अधिक से अधिक जानें और गौरवान्वित महसूस करें इसके लिये हमें अपने वैश्विक पटल तक बात डिजीटल मीडिया, प्रिन्ट मिडिया, मौखिक, रेडियो, इलैक्ट्रोनिक, सोशल मीडिया के माघ्यम से पहुंचानी होगी।
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