झुंझुनू
महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त व स्वतंत्रता सेनानी मीरा बेन और दक्षयानी वेलायुद्धन की पुण्यतिथि मनाई
बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर लेखक धर्मपाल गाँधी ने हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा करने का ऐलान किया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं सूरजगढ़। आदर्श समाज समिति इंडिया के कार्यालय सूरजगढ़ में देश की आजादी के लिए जान की बाजी लगाने वाले क्रांतिवीर सरदार भगत सिंह के साथी स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त व महात्मा गाँधी के सिद्धांतों की उन्नति और भारत की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता व स्वतंत्रता सेनानी मीरा बेन और संविधान सभा की युवा सदस्य व स्वतंत्रता सेनानी दक्षयानी वेलायुद्धन की पुण्यतिथि मनाई। स्वतंत्रता सेनानियों के छायाचित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम पर शोध कर रहे लेखक और दार्शनिक धर्मपाल गाँधी ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी जुटाने के लिए हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा करने का निर्णय लिया। बहुत जल्दी लेखक धर्मपाल गाँधी अपने साथियों के साथ शहीदों को नमन करने के लिए हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा करेंगे। हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीद स्मारक भारत के स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के बलिदान का प्रतीक है। यहां पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और बटुकेश्वर दत्त की समाधियां हैं और शहीदों की प्रतिमाएं लगी हुई हैं। भगत सिंह की माताजी विद्यावती देवी की समाधि भी यहीं पर है। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी ने बताया कि भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे प्रसंग हैं, जिन्हें जानना और समझना बहुत जरूरी है। देश की आजादी के लिए अनेक क्रांतिकारियों और महिला स्वतंत्रता सेनानियों ने अमानवीय यातनाएं सहीं हैं। मगर दुख की बात ये है कि उन्हें आज तक वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। इसके विपरीत जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में भाग नहीं लिया और देश की आजादी के लिए अपने जीवन में कोई आंदोलन नहीं किया, उन लोगों का महिमामंडन किया जा रहा है। सरकार भी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ भेदभाव कर रही है। बटुकेश्वर दत्त भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक थे। बटुकेश्वर दत्त, जिन्होंने 1929 में अपने साथी भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजी सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेम्बली में बम फेंक कर इंक़लाब-ज़िंदाबाद के नारों के साथ ज़िंदगी भर को काला-पानी तस्लीम किया था। सरकार ऐसे क्रांतिवीरों को भुला रही है। स्वतंत्रता सेनानी मीराबेन के बारे में जानकारी देते हुए धर्मपाल गाँधी ने कहा- मीरा बेन एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी की बेटी थी, उनका मूल नाम मैडलिन स्लेड था। महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने आजादी की लड़ाई में भाग लिया। मीरा बेन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही आजादी की लड़ाई में अंत तक उनकी सहयोगी रहीं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 9 अगस्त को गाँधी जी के साथ उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। आगा खां हिरासत केंद्र में मई, 1944 तक रखा गया। परंतु उन्होंने गाँधी जी का साथ नहीं छोड़ा। 1931 के द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भी वह महात्मा गाँधी के साथ थीं। स्वतंत्रता सेनानी दक्षयानी वेलायुद्धन के बारे में धर्मपाल गाँधी ने बताया कि वह भारतीय राजनीतिज्ञ और उत्पीड़ित वर्गों के नेता थी। वह अनुसूचित जाति की प्रथम स्नातक महिला होने के अलावा प्रथम विधायक और संविधान सभा के लिए चुने जाने वाली एकमात्र दलित महिला थीं। पहली और एकमात्र दलित महिला विधायक दक्षयानी वेलायुद्धन को सम्मानित करते हुए केरल सरकार ने ‘दक्षयानी वेलायुद्धन पुरस्कार’ का गठन किया है, जो राज्य में अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने में योगदान देने वाली महिलाओं को दिया जायेगा। पुरस्कार के लिए बजट में दो करोड़ रुपये रखे गये हैं। कार्यक्रम में देश की प्रथम महिला न्यायाधीश अन्ना चांडी को भी उनकी पुण्यतिथि पर याद किया। अन्ना चांडी ने आजादी से पहले देश की प्रथम महिला न्यायाधीश बनने का गौरव हासिल किया था। इस अवसर पर आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी, उप-सरपंच राकेश कुमार, मुकेश कुमार राठी, सुरेंद्र कुमार भाटी, दरिया सिंह डीके, सुनील गाँधी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।



