अमरोहा
कर्बला जालिम के खिलाफ खड़ा होने का दर्स देती है- मौलाना जाहिद हुसैन
सय्यदे सज्जाद की याद में शबबेदारी व जूलूस

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सैद नगली। कर्बला को याद रखना हमारे लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि जिसने भी कर्बला के वाकिए का अध्ययन किया है, वह कभी भी जालिम की हिमायत नहीं कर सकता। नगर पंचायत सैद नगली में इमामबारगाह वक्फ मिसमात फात्मा में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें मर्सियाख्वानी सलमान हैदर और उनके हमनवाओं ने की। मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना जाहिद हुसैन रामपुरी ने कर्बला के वाकिए पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला में दीन को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। कर्बला के बाद इमाम जैनुल आबिदी को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। आप पूरी उम्र अपने बाबा को याद करके रोते रहे। मजलिस के बाद स्थानीय अंजुमन ए पंजतनी सैदनगली के साहिब ए बयाज़ हैदर अब्बास, सुहैल अब्बास, मिसाल अब्बास ने नौहाख्वानी की। उसके बाद बाहर आने वाली अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की। जिस में मुख्य रूप से अंजुमन ए हुसैनिया क़दीम हरदौई (रजि०) के साहिब ए बयाज़ पंडित छोटेलाल, अंजुमन ए पंजतनी सिरसी सादात के साहिब ए बयाज़ लकी जाफरी, अंजुमन दुआए जेहरा मुजफ्फरनगर के साहिब ए बयाज़ शबीह अब्बास, अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली सादात के साहिब ए बयाज़ जुहैर अब्बास, दस्ता ए हुसैनी मेरठ के साहिब ए बयाज़ हुमायूँ ज़ैदी, अंजुमन हाशमी इकरोटियां के साहिब ए बयाज़ रविश, अंजुमन ए पंजतनी जलालपुर के साहब बयाज़ आरजू जलालपुरी एवं अंजुमन अज़ा ए हुसैनी रसूलपुर ने अपने मखसूस अंदाज़ में नौहाख्वानी व सीनाज़नी की। उस के बाद इमामबारगाह से एक शबीहे ताबूत बरामद हुआ। जो अपने तयशुदा रासतों से होकर इमामबारगाह मुजाहिद हुसैन में जाकर समाप्त हुआ। जहां पर सभी अंजुमनों ने अलविदा नोहा पढ़ा। पूरी रात शबबेदारी रही। इस अवसर पर मुख्य रूप से इक़बाल ज़फर, मौ० अब्बास, हैदर अब्बास, मिसाल अब्बास, सुहेल अब्बास एडवोकेट, कुमैल असगर, इमरान मुर्तजा एडवोकेट, फजल अब्बास, रिजवान हैदर, रियाजुल हसन, मौ० जमा, अरीब हैदर एड, डा० अहमद मुर्तज़ा, मौलाना क़म्बर, शरफ मुर्तज़ा, दानिश बाक़री, अलाउद्दीन सैफ़ी, बिलाल बाक़री, नसीरुल हसन, अम्मार रिज़वी, ज़ीशान हैदर आदि मौजूद रहे। प्रोग्राम का संचालन डॉ० अहमद मुर्तजा ने किया।



