सिंगापुर में आयोजित WCES 2025 में भारत की चिकित्सा तकनीक ने बढ़ाया मान।
डॉ. सुभाष खन्ना ने पेश की ओलिम्पस की नई ‘येलो कलर-कोडेड सर्जरी’ तकनीक।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : सिंगापुर में हाल ही में संपन्न वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ एंडोस्कोपिक सर्जरी (WCES 2025) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए असम के मशहूर डॉ. सुभाष खन्ना ने ओलिम्पस द्वारा विकसित नवीन येलो कलर-कोडेड सर्जरी तकनीक और देश में विकसित कलर-कोडेड सरफेस सर्जरी प्रक्रियाओं का सफल परिचय कराया। यह अत्याधुनिक नवाचार शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में विज़ुअलाइजेशन और सटीकता को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। डॉ. सुभाष खन्ना ने बताया कि यह तकनीक सर्जरी के दौरान रंग-आधारित सतही मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे चिकित्सक को अंग संरचना की सटीक पहचान में मदद मिलती है और संभावित जटिलताओं की संभावना घटती है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य की सर्जरी की दिशा तय करने वाला एक बड़ा कदम है। इस अवसर पर डॉ. डेविडे लोमान्टो और WCES–ELSA सिंगापुर टीम ने आयोजन को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से संपन्न किया। उनके आमंत्रण और सहयोग के लिए डॉ. सुभाष खन्ना ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस मंच पर विश्वभर से आए सर्जन और वैज्ञानिकों ने नवीनतम रोबोटिक एवं एंडोस्कोपिक तकनीकों पर विचार-विमर्श किया। भारत की ओर से प्रोफेसर स्वगत खन्ना भी इस सम्मेलन में मौजूद थीं। दोनों विशेषज्ञों ने न केवल वैज्ञानिक चर्चाओं में भाग लिया, बल्कि साझा अनुभवों के माध्यम से कई नई संभावनाओं पर संवाद किया। इस अवसर पर डॉ. सुभाष खन्ना ने विश्व के नामी सर्जनों – डॉ. बैरी साल्की, प्रोफेसर निकोल बुवी, प्रोफेसर नातन ज़ुंडेल, डॉ. एडुआर्डो तार्गारोना समेत अन्य वरिष्ठ विशेषज्ञों के साथ विचार-विनिमय किया। उन्होंने अपने प्रेज़ेंटेशन में ARIS Fellowship Programme का भी परिचय दिया, जिसे भारत में रोबोटिक और नवाचारी शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण का गौरवशाली चरण माना जा रहा है। डॉ. सुभाष खन्ना ने ओलिम्पस जापान का विशेष धन्यवाद किया, जिन्होंने भारत की टीम पर विश्वास जताते हुए उन्हें नई Yellow Enhancement (YE) तकनीक और YE-असिस्टेड ब्रेस्ट सर्जरी को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि यह विश्वास भारतीय चिकित्सा शोध और नवाचार को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।आयोजन के दौरान डॉ. सुभाष खन्ना ने एक भावनात्मक क्षण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि सिंगापुर में रहते हुए हाल ही में दिवंगत हुए असम के महान गायक ज़ुबिन गर्ग की यादें मन को उदासी से भर देती हैं। उन्होंने कहा, “ज़ुबिन गर्ग की आवाज़ हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेगी; उनका संगीत अमर रहेगा।” इस प्रकार WCES 2025 न केवल चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों का मंच बना, बल्कि यह आयोजन वैश्विक सहयोग, नवाचार और मानवीय संवेदनाओं का भी प्रतीक सिद्ध हुआ।


