बागपत

 स्पेशल इंटरव्यू – “हौसले से जीती मातृत्व की जंग”

उत्तम हॉस्पिटल, दिल्ली–सहारनपुर हाईवे रोड, बड़ौत (बागपत)

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

रिपोर्टर :
“मां… एक ऐसा शब्द जिसमें त्याग भी है, तप भी और असीम प्रेम भी। जब बात बच्चे की ज़िंदगी की हो, तो मां किसी भी हद तक जा सकती है। लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे मोड़ पर आ खड़े होते हैं, जहां ‘मां का हौसला’ और ‘डॉक्टर की काबिलियत’ — दोनों की असली परीक्षा होती है।
बागपत की धरती पर एक ऐसी ही डॉक्टर ने वो कर दिखाया, जो कई लोग ‘नामुमकिन’ कह चुके थे। हम बात कर रहे हैं — डॉ. सुमेधा आर्य की, जिन्होंने न सिर्फ एक महिला की ज़िंदगी में खुशियों की नई सुबह लाई, बल्कि चिकित्सा जगत में एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।”


रिपोर्टर:
“हाल ही में टयोढी गांव की एक गर्भवती महिला का मामला सामने आया। सभी डॉक्टरों ने एक ही बात कही — ‘बच्चा उल्टा है… नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं… ऑपरेशन ही एकमात्र रास्ता है।’
परिवार के चेहरे पर डर था, उम्मीद जैसे खत्म हो चुकी थी। और तभी — डॉ. सुमेधा आर्य ने वो शब्द कहे जो पूरे माहौल को बदल गए —
‘मैं संपूर्ण आत्मविश्वास से कहती हूँ, कि में इस बच्चे को नॉर्मल डिलीवरी से करवाऊँगी।’

वो क्षण सिर्फ एक डॉक्टर की हिम्मत नहीं, एक मां की ज़िंदगी को नई दिशा देने वाला फैसला था।”


डॉ. सुमेधा आर्य :
“जब मैंने उस महिला की आंखों में डर देखा, तो लगा जैसे वो मुझसे कह रही हो — ‘मेरे बच्चे को बचा लो।’
उस पल मैंने ठान लिया कि डर को जीत में बदलना है। परिवार को भरोसा दिलाया, महिला को मानसिक रूप से तैयार किया और हमारी टीम ने पूरा ध्यान, समय और समर्पण दिया। जब नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ, उस मां की आंखों में जो चमक थी… वो किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। वही असली जीत थी।”


रिपोर्टर:
“ऐसे न जाने कितने केस रहे, जिनमें दूसरे डॉक्टर्स ने ‘सी-सेक्शन’ को आखिरी विकल्प बताया। लेकिन डॉ. सुमेधा ने भरोसे को चुना… और एक के बाद एक नॉर्मल डिलीवरी करवा कर दिखाया। यही वो आत्मविश्वास है, जो आज सैकड़ों महिलाओं में नई उम्मीद जगा रहा है।”


डॉ. सुमेधा आर्य (प्रेरणादायक):
“हर महिला में नॉर्मल डिलीवरी की एक नैसर्गिक क्षमता होती है। सही मार्गदर्शन, मानसिक शक्ति और मेडिकल मॉनिटरिंग से असंभव भी संभव हो जाता है। मेरे लिए हर डिलीवरी एक भावनात्मक यात्रा है — जिसमें डॉक्टर और मां दोनों मिलकर एक नई ज़िंदगी को जन्म देते हैं।”


रिपोर्टर :
“डॉ. सुमेधा आर्य ने एक बार फिर साबित कर दिया — सच्चा डॉक्टर वही है जो मरीज में डर नहीं, भरोसा जगाए। उन्होंने ऑपरेशन के बजाय आत्मविश्वास को चुना… और अनगिनत परिवारों को मातृत्व की मुस्कान लौटाई।

नेशनल प्रेस टाइम्स सलाम करता है इस जज़्बे को — जो हर ‘नहीं’ को ‘हाँ’ में बदल देता है।
यह कहानी सिर्फ एक डॉक्टर की नहीं… ये कहानी है उम्मीद की, हिम्मत की और मातृत्व की सच्ची ताकत की।”

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