गोड्डा
डोर टू डोर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन रोगियों के समक्ष कराएं जाए : उपायुक्त
फाइलेरिया रोधी टेबलेट खुद खाकर उपायुक्त ने कहा- दवा सुरक्षित और प्रभावी, सभी लोग इसे खाएं।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त अंजली यादव की अध्यक्षता में द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत् आयोजित एमडीए/आईडीए कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया गया। इस दौरान उपायुक्त ने कार्यक्रम स्थल पर सबसे पहले फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन अन्य वरीय अधिकारियों के साथ किया। जिलेवासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों में डोर टू डोर आगामी 25 अगस्त तक दवा की खुराक खिलाई जाएगी।इस दौरान उपायुक्त ने कहा कि फाइलेरिया मच्छर जनित बीमारी है। यह संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है, जिससे किसी भी उम्र में व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। फाइलेरिया से मुक्ति के लिए 02 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी उम्र के अनुसार जिले में डोर टू डोर कैंपेन के माध्यम से डीईसी तथा एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक खिलाई जा रही है।इस रोग को लिम्फैटिक फाइलेरिया या हाथीपांव भी कहते हैं। फाइलेरिया का कारण परजीवी कृमि होते हैं। जब कोई संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वह कृमि के लार्वा को व्यक्ति के रक्तप्रवाह में छोड़ देता है। ये लार्वा बाद में लिम्फैटिक सिस्टम में जाकर वयस्क कृमि में विकसित हो जाते हैं। ये वयस्क कृमि कई सालों तक जीवित रह सकते हैं और लाखों की संख्या में सूक्ष्म कृमि (माइक्रोफाइलेरिया) पैदा करते हैं, जो रक्त में घूमते रहते हैं। ज्यादातर लोगों में इस रोग के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते है। लंबे समय बाद, यह रोग शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। इसके मुख्य लक्षण हैं हाथों, पैरों, स्तनों, या जननांगों में गंभीर सूजन (लिम्फेडेमा)। पुरुषों में अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील), त्वचा का मोटा और कठोर होना (हाथीपांव), बार-बार बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द। लिम्फ नोड्स (लसिका ग्रंथि) में दर्द और सूजन। इस रोग के इलाज के लिए डायएथिलकार्बामाज़िन साइट्रेट नामक दवा का उपयोग किया जाता है। यह दवा परजीवी कृमि और माइक्रोफाइलेरिया दोनों को मारती है। आइवरमेक्टिन और एल्बेंडाजोल जैसी अन्य दवाओं का भी उपयोग किया जाता है।उन्होंने जिलेवासियों से अपील किया कि अपनी आयु एवं हाइट के हिसाब से सभी लोग अपना दवा ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के सामने ही खाएं ताकि अभियान को सफल बनाया जा सके। इस मौके पर उपविकास आयुक्त दीपक कुमार दूबे, अपर समाहर्ता प्रेमलता मुर्मू, सिविल सर्जन डॉ० एस सी शर्मा, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी गोड्डा, रितेश जयसवाल, जिला योजना पदाधिकारी फैजान सरवर सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी अभय कुमार झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी दीपक कुमार, डीएमएफटी की टीम, जिला शहरी स्वास्थ्य प्रबंधक जयशंकर, बीटीटी बेबी कुमारी सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग के कर्मीगण मौजूद थे।




