ललितपुर

धरती बनी दुल्हन, कविता बनी सेतु

काव्य सम्मेलन में बही एकता और संवेदना की धारा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जनपद ललितपुर के ग्रामीण परिवेश में हिंदी-उर्दू-अवधी संगम की सुगंध बिखेरता भव्य काव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। हरियाली से सजे खेत-खलिहानों और लहलहाती सरसों के बीच साहित्यिक संस्था के बैनर तले हुए इस आयोजन ने सांप्रदायिक सौहार्द, मानवीय रिश्तों और प्रकृति-प्रेम का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य चिकित्साधीक्षक एवं कवि डॉ. खेमचन्द्र वर्मा ने की, जबकि सफल संचालन महेश नामदेव ‘भास्कर’ ने किया। आयोजन के केंद्र में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अधिवक्ता रामकृष्ण कुशवाहा का 68वां जन्मदिन रहा, जिसे शिवालय में पूजन-अर्चना के उपरांत काव्य-समारोह के रूप में मनाया गया।
कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया—
“तितलियां नाच रहीं फूलों पर, प्रकृति दे रही बधाई है,
धरती बनी है आज दुल्हन, जैसे गगन से हो रही सगाई है।”
वरिष्ठ कवि सरवर हिन्दुस्तानी ने दोस्ती और भाईचारे का संदेश देते हुए कहा—
“ख़त्म न हो जाए दोस्ती के रिश्ते, दुआ सलाम रहने दो,
दोस्तों के दरम्यां अस्सलामलेकुम, जय सियाराम रहने दो।”
कार्यक्रम में सुमनलता शर्मा ‘चांदनी’, शीलचन्द्र शास्त्री ‘शील’, महेश नामदेव ‘भास्कर’, राधेश्याम ताम्रकार, पलाश कश्यप सहित अनेक कवि-शायरों ने गीत, ग़ज़ल और कविताओं से समां बांधा। रचनाओं में गांव की मिट्टी, रिश्तों की मिठास, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदना प्रमुख रही।
श्रोताओं में राजाराम खटिक एडवोकेट, जलील बख्श, एम.आर. खान सोज, रामप्रकाश शर्मा, नारायण सिंह यादव, संदीप, रोहित, मनीष कुशवाहा, रमसेवक, देवेंद्र यादव, मनोरमा, दीपिका, प्रेमदेवी, मीना देवी, काजल, प्रीति, सिद्धार्थ एवं माही सहित बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक रामकृष्ण कुशवाहा एडवोकेट ने सभी कवियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
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