सिंगरौली
सीटाडेल कंपनी पर लगा लाखों रुपए के फर्जी बिल का आरोप ?
सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र में कचरा प्रबंधन बना बड़ा घोटाला..

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिले में स्वच्छता अभियान को लेकर जहां नगर पालिक निगम सिंगरौली बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकता, वहीं हकीकत इन दावों के ठीक उलट दिखाई दे रही है। नगर निगम के 1 से 45 वार्डों तक कचरा उठाने की जिम्मेदारी जिस सीटाडेल कंपनी को सौंपी गई है, उस पर अब भारी अनियमितताओं और फर्जी बिलिंग के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी ने कचरा संग्रहण और निस्तारण के नाम पर लाखों रुपए के फर्जी बिल बनाकर निगम के साथ बड़ा आर्थिक घोटाला किया है।
कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी, लेकिन मैदान में बदबू और बीमारी..
नगर निगम सिंगरौली द्वारा अनुबंधित सीटाडेल कंपनी को वार्ड 1 से 45 तक का कचरा एकत्र कर गनियारी कचड़ा संग्रह प्लांट में ले जाकर उसका प्रसंस्करण (मैन्युफैक्चरिंग) करने और उससे खाद बनाकर किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन वास्तविकता में कंपनी ने इन व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ा दी हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीटाडेल कंपनी द्वारा एकत्र किया गया कचरा निर्धारित प्रोसेसिंग सेंटर तक पहुंचाने के बजाय रेलवे क्रॉसिंग के पास खुले में डंप कर दिया जा रहा है। इस खुले कचरे से लगातार बदबू फैल रही है, जिससे आसपास के बस्तियों के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
बदबू और प्रदूषण से फ़ैल रही बीमारियां…
कचरे के इस ढेर से न केवल आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि कई पशुओं की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़े हुए कचरे से निकलने वाली जहरीली गैस और मच्छरों की बढ़ती संख्या से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई घरों में लोग उल्टी, बुखार, और सांस की समस्याओं से पीड़ित हैं।
जलस्रोतों में मिल रहा कचरा, नल-जल योजना पर संकट..
इतना ही नहीं, कचरे से निकलने वाला गंदा पानी नालियों और नदियों में मिल रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रदूषित पानी अब तालाबों और नल-जल योजना के जलस्रोतों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को आपूर्ति किया जाने वाला पानी भी दूषित हो गया है। जानकारों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है। सीटाडेल कंपनी के स्थानीय मैनेजर राघवेंद्र सिंह से इस पूरे मामले पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कंपनी के अधिकारी और नगर निगम के कुछ कर्मचारी आपस में मिलीभगत करके फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए का दुरुपयोग कर रहे हैं।
कई शिकायते हुई है जाँच के बाद होगी कार्रवाई: रुपाली द्विवेदी
जब इस पूरे मामले पर नगर पालिक निगम सिंगरौली की उपायुक्त रूपाली द्विवेदी से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि सीटाडेल कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनके अनुसार, “सीटाडेल कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि कंपनी की लापरवाही सिद्ध होती है, तो उसके खिलाफ अनुबंध निरस्त करने सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी,शहरवासियों ने मांग की है कि पूरे कचरा प्रबंधन तंत्र की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि निगम और कंपनी की मिलीभगत से न केवल जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम सिंगरौली में चल रहा यह “कचरा प्रबंधन घोटाला” अब प्रशासन और जनता दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सिंगरौली के नागरिक कचरे के ढेर और बदबू के बीच जीने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक निगम और ठेकेदार कंपनियां जिम्मेदारी से बचती रहेंगी और कब जनता को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का वास्तविक हक मिलेगा?




