गाजियाबाद

 मंडोला में किसानों का सत्याग्रह तेज

प्रदूषण, मुआवजा और मुकदमों को लेकर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : गाजियाबाद के मंडोला क्षेत्र में किसान सत्याग्रह आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। आज  किसानों के सांकेतिक प्रदर्शन के दौरान एक नया विवाद सामने आया, जिसमें किसानों ने आवास विकास परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों पर औद्योगिक कचरे में आग लगाकर प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया है।
प्रत्यक्षदर्शी किसानों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में ट्रॉनिका सिटी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी, साथ ही 112 नंबर पर भी सूचना दी गई थी। मौके पर अग्निशमन विभाग की मदद से आग बुझाई गई, लेकिन आरोप है कि दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन ने उल्टा किसानों पर ही सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमे दर्ज कर दिए।
किसानों का आरोप है कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि अधिकारी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसान और मजदूर पिछले 10 वर्षों से अपनी अधिग्रहीत भूमि के उचित मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। 27 अप्रैल को किसानों और महिलाओं ने सांकेतिक तालाबंदी भी की थी। इस दौरान मौके पर पहुंचे एसीपी लोनी, ट्रॉनिका सिटी थाना प्रभारी और आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने वार्ता फिर से शुरू करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन स्थगित कर दिया।
हालांकि, किसानों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों पर पहले भी प्रदूषण फैलाने के मामले दर्ज हो चुके हैं, जो गाजियाबाद न्यायालय में विचाराधीन हैं।
किसानों की मांग है कि खाली पड़ी जमीन को अवैध डंपिंग ग्राउंड बनाकर कचरा जलाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे
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