धनबाद
“सरकारी पंचायत भवन पर कब्जे का बड़ा आरोप!
जिला परिषद सदस्य ने खोला मोर्चा, डीसी से लेकर थाना प्रभारी तक को भेजी लिखित शिकायत" थाना प्रभारी ने बंद करवाया निर्माण कार्य।
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
धनबाद : बाघमारा के तेतुलमारी थाना क्षेत्र के तेतुलमारी स्टेशन चौक स्थित नगरीकला दक्षिण पंचायत के पुराने पंचायत भवन पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। सोमवार की शाम जिला परिषद सदस्य इसराफिल लाला ने अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया और इसे सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे की गंभीर कोशिश बताया।
प्रेस वार्ता के दौरान इसराफिल लाला ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत धनबाद उपायुक्त (डीसी), जिला परिषद अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त (डीडीसी), बाघमारा अंचल अधिकारी (सीओ), बाघमारा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), तेतुलमारी थाना प्रभारी समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को सौंप दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तेतुलमारी पाण्डेडीह निवासी राम दयाल सिंह एवं अभिमन्यु सिंह द्वारा सार्वजनिक पंचायत भवन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर उसे निजी घर का स्वरूप दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह भवन वर्षों तक रक्तदान शिविर, टीकाकरण अभियान, सरकारी कार्यक्रमों और चुनाव के दौरान मतदान केंद्र के रूप में उपयोग होता रहा है। बाद में भवन जर्जर होने पर पंचायत कार्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन इसका उद्देश्य कभी भी निजी उपयोग नहीं था। ऐसे में सार्वजनिक संपत्ति पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसराफिल लाला ने बताया कि उन्होंने पहले ही इस भवन की मरम्मत के लिए डीडीसी को लिखित अनुशंसा की थी, ताकि इसे पुनः जनहित के कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पंचायत स्तर की राजनीति के सहारे इस सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा जमाने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बाघमारा के अंचल अधिकारी और तेतुलमारी थाना प्रभारी का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद दोनों अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल मौके पर चल रहे कथित अवैध निर्माण कार्य को रुकवा दिया। साथ ही आगे भी नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, सार्वजनिक भवन को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराया जाए तथा भविष्य में सरकारी संपत्तियों पर इस तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अब यह मामला प्रशासन के पाले में है और क्षेत्र की जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाती है।


