गाजियाबाद
लोनी में अभी से गरमाने लगा विधानसभा चुनाव का सियासी पारा
दावेदारों ने बिछानी शुरू की चुनावी गोटियां
जनसुविधाओं की बदहाली के बीच सक्रिय हुए संभावित दावेदार
कोई बिजली तो कोई जनसंपर्क और सामाजिक आयोजनों के जरिए तलाश रहा है अपनी सियासी जमीन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन लोनी विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक तापमान अभी से बढ़ता दिखाई देने लगा है। विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए धीरे-धीरे चुनावी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। कोई गांव-गांव और कॉलोनी-कॉलोनी घूमकर मतदाताओं का मन टटोल रहा है तो कोई बिजली, सड़क और अन्य जनसमस्याओं को लेकर अपनी सक्रियता दिखा रहा है। वहीं कुछ संभावित दावेदार बड़े-बड़े होर्डिंग और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं।
राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने वालों का कहना है कि चुनाव में भले ही अभी काफी समय हो, लेकिन लोनी जैसी बड़ी विधानसभा सीट पर टिकट के संभावित दावेदारों के बीच अंदरखाने की सक्रियता तेज हो चुकी है। खासकर भाजपा में टिकट को लेकर कई नामों की चर्चा के बीच हर दावेदार अपनी अलग रणनीति बनाने में जुटा नजर आ रहा है।
भाजपा से जुड़े होने की पहचान हटाने से लेकर होर्डिंग लगाने तक चर्चा में रहा एक दावेदार
भाजपा से टिकट की दौड़ में शामिल बताए जा रहे एक दावेदार की राजनीतिक गतिविधियां पिछले कुछ समय से क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बताया जाता है कि कुछ समय पहले इस दावेदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भाजपा से जुड़े होने की अपनी पहचान हटा ली थी। इसके बाद भाजपा से जुड़े एक नेता ने एक इंटरव्यू के दौरान उन्हें पार्टी का कार्यकर्ता मानने से भी इनकार कर दिया था।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि इसके बाद उक्त दावेदार ने भाजपा से अपनी राजनीतिक नजदीकी प्रदर्शित करते हुए होर्डिंग लगवाए और कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों पर अपने समर्थकों के साथ पुष्पवर्षा कराई। इस कार्यक्रम की क्षेत्र में काफी चर्चा हुई और इसे उनकी राजनीतिक सक्रियता से जोड़कर देखा गया।
दिलचस्प बात यह रही कि इस गतिविधि के बाद इस दावेदार की सक्रियता अचानक कम दिखाई देने लगी। 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों के दौरान भी क्षेत्र में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी कही नजर नहीं आई। राजनीतिक जानकार इसे चुनाव से पहले अपनी रणनीति को लेकर दावेदारों के बीच चल रही उठापटक का हिस्सा मान रहे हैं।
हरियाली तीज कार्यक्रम ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
दूसरी ओर लोनी नगरपालिका परिषद की चेयरमैन रंजीता धामा और उनके पति मनोज धामा द्वारा बंथला स्थित लेखा फार्म हाउस में आयोजित हरियाली तीज कार्यक्रम ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। कार्यक्रम में महिलाओं, युवतियों और बच्चों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बसों और कारों के पहुंचने के कारण बंथला क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें भी देखने को मिलीं।
कार्यक्रम की भीड़ को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का एक वर्ग मानता है कि कार्यक्रम के जरिए धामा परिवार ने न केवल सामाजिक प्रभाव और महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ का प्रदर्शन किया, बल्कि संभावित विधानसभा चुनाव की दृष्टि से अपने समर्थकों और नजदीकी लोगों का मन भी टटोलने का प्रयास किया।
हालांकि मनोज धामा की विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं पहले से चलती रही हैं। ऐसे में हरियाली तीज कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जाना स्वाभाविक है। कार्यक्रम के बाद टिकट की दौड़ में शामिल अन्य संभावित दावेदारों के बीच बेचैनी बढ़ने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है।
बिजली के मुद्दे पर भी सक्रियता बढ़ी
लोनी में संभावित दावेदारों की सक्रियता केवल सामाजिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में बिजली कटौती और विद्युत व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। कोई बिजली की समस्या को लेकर धरने पर बैठ रहा है तो कोई सोशल मीडिया के माध्यम से बिजली के मुद्दे को लगातार उठाकर जनता के बीच अपनी सक्रियता दर्ज करा रहा है।
इससे साफ है कि संभावित उम्मीदवार अब उन मुद्दों की तलाश में हैं जो सीधे आम मतदाता से जुड़े हैं। बिजली, सड़क, जलभराव, सफाई, यातायात और जाम जैसे मुद्दे आने वाले समय में चुनावी बहस का प्रमुख हिस्सा बन सकते हैं।
जनता की असली परीक्षा जनसुविधाओं के मोर्चे पर
राजनीतिक दावेदारों की बढ़ती सक्रियता के बीच लोनी की जनता की सबसे बड़ी चिंता अभी भी बुनियादी जनसुविधाएं हैं। क्षेत्र में सड़क और यातायात की समस्या गंभीर बनी हुई है। कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति आम हो चुकी है और लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जलभराव, सफाई, बिजली और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
ऐसे में आने वाले समय में मतदाता भी संभावित दावेदारों से यह सवाल पूछ सकता है कि चुनाव से पहले दिखाई देने वाली सक्रियता केवल टिकट हासिल करने तक सीमित है या वास्तव में क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संघर्ष किया जाएगा।
चुनाव नजदीक आते ही वादों की फेहरिस्त भी बढ़ेगी
लोनी की राजनीति को करीब से देखने वालों का मानना है कि अभी चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। टिकट के दावेदारों की संख्या, राजनीतिक समीकरण और दलों की रणनीति आने वाले महीनों में कई बार बदल सकती है। फिलहाल हर संभावित उम्मीदवार अपने तरीके से राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटा है।
किसी के लिए जनसमस्या मुद्दा है, किसी के लिए सामाजिक कार्यक्रम ताकत का प्रदर्शन, तो कोई लगातार जनसंपर्क के जरिए अपनी स्वीकार्यता परख रहा है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, वैसे-वैसे जनता को विकास, समस्याओं के समाधान और लोनी को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े सपने भी दिखाए जाएंगे।
लेकिन इस बार असली सवाल यह होगा कि लोनी की जनता नारों और वादों से आगे जाकर किसे अपनी समस्याओं का वास्तविक समाधानकर्ता मानती है। फिलहाल चुनाव दूर है, लेकिन लोनी की सियासी बिसात पर मोहरे चलने शुरू हो चुके हैं और आने वाले दिनों में यह मुकाबला और दिलचस्प होने के आसार हैं।

