गोड्डा

खनिज संपदा पर डाका  बर्दाश्त नहीं-प्रदीप यादव

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ‘पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी’ की बैठक में राज्य और जनहित से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद हमारे प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता कर आगामी रणनीति साझा की। ​खनिज संपदा पर डाका बर्दाश्त नहीं, चरणबद्ध महा-आंदोलन का ऐलान एवं आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी : ​केंद्र सरकार द्वारा लाया जा रहा ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक’ पूरी तरह से झारखंड विरोधी है। यह कानून राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने और झारखंडियों के अधिकारों को छीनने की एक सोची-समझी साजिश है।
​कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेगी : ​प्रखंड, जिला एवं प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन और राजभवन तक विशाल महारैली का आयोजन होगा। ​यदि केंद्र सरकार ने इस जनविरोधी विधेयक को वापस नहीं लिया, तो झारखंड की खनिज संपदा का बाहर जाना बंद करने के लिए आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। हमारे जल-जंगल-जमीन और खनिजों पर पहला हक झारखंड की जनता का है!
​छात्रों की जीत, सरकार का आभार : छात्रों के लंबे संघर्ष और उनकी जायज मांगों को कैबिनेट द्वारा स्वीकृति दिए जाने पर राहुल गांधी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूरे मंत्रिमंडल को बधाई दी गई। इन मांगों को सही तरीके से धरातल पर लागू कराने के लिए कांग्रेस सरकार को लगातार सुझाव देती रहेगी।
​विस्थापितों के हक की लड़ाई : ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013’ का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। विस्थापित परिवारों को उनका पूरा हक, उचित मुआवजा और पुनर्वास दिलाने के लिए कांग्रेस मजबूती से मैदान में लड़ेगी। ​जनसंख्या आधारित परिसीमन का पुरजोर विरोध :
केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से झारखंड में आदिवासियों की सीटें और राजनीतिक प्रभाव घटेगा। पार्टी आदिवासी सीटों के संरक्षण के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।
​जाति जनगणना एवं सरना धर्म कोड : जाति जनगणना में ओबीसी (OBC) कॉलम और ‘सरना धर्म कोड’ को शामिल कराने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी और राज्यव्यापी आंदोलन को गति दी जाएगी।
​’बिरसा AI’ पोर्टल : वोटर लिस्ट में छूटे हुए मतदाताओं (Unmapped Voters) की मैपिंग और सशक्त निगरानी के लिए ‘बिरसा AI’ पोर्टल की शुरुआत की गई है। पोड़ैयाहाट विधायक सह विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि ​झारखंड की जनता, आदिवासियों, मूलवासियों और छात्रों के हक-अधिकार की रक्षा के लिए हमारी यह लड़ाई अंतिम सांस तक जारी रहेगी।
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