ललितपुर
एन.एच.-44 पर रेलिंग निर्माण के विरोध में ग्रामीणों का चक्काजाम, घंटों बाधित रहा यातायात
ग्राम रोंडा के सामने 30 फीट रास्ता छोडऩे की मांग, प्रशासन के आश्वासन पर समाप्त हुआ प्रदर्शन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 (एनएच-44) पर ग्राम रोंडा के सामने रेलिंग (सेफ्टी गार्ड) लगाए जाने के विरोध में बुधवार को ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। अचानक हुए प्रदर्शन के चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात घंटों प्रभावित रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ग्राम रोंडा के पास हाईवे के डिवाइडर एवं दोनों ओर सुरक्षा की दृष्टि से रेलिंग लगाने का कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्धारित स्थान पर पूरी तरह रेलिंग लगा दी गई तो गांव का मुख्य आवागमन मार्ग बंद हो जाएगा, जिससे हजारों ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम रोंडा से मन्नू पेट्रोल पंप की ओर लगभग दो किलोमीटर तक तथा झांसी की दिशा में करीब एक किलोमीटर तक सड़क पार करने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और आम नागरिकों को दूसरी ओर जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मांग थी कि गांव के मुख्य आवागमन स्थल पर हाईवे के बीच कम से कम 30 फीट चौड़ा कट या रास्ता छोड़ा जाए, ताकि लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। इसी मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण हाईवे पर एकत्र हो गए और चक्काजाम कर दिया। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं। करीब एक घंटे तक चली बातचीत के दौरान ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में अधिकारियों ने मामले को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने तथा जनहित में समाधान निकालने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर दिया। जाम खुलने के बाद यातायात पुन: सुचारु हो सका। इस दौरान हाईवे पर फंसे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ग्राम रौंडा के मुख्य मार्ग पर 30 फीट चौड़ा रास्ता सुरक्षित रखते हुए ही रेलिंग निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों के आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।



