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शोपियां में जमात-ए-इस्लामी के ठिकानों पर बड़ा सर्च ऑपरेशन

वअढअ के तहत कार्रवाई

नई दिल्ली। जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर पर भारत सरकार द्वारा कई बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है। सबसे हालिया प्रतिबंध 2019 में कथित राष्ट्र-विरोधी अलगाववादी गतिविधियों और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी समूहों के साथ संबंधों के कारण गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (वअढअ) के तहत लगाया गया था। फरवरी 2024 में प्रतिबंध को पाँच साल के लिए और बढ़ा दिया गया था।
शोपियां पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार को जिÞले में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई। पुलिस शोपियां जिÞले में कई जगहों पर सावधानीपूर्वक समन्वित तलाशी ले रही थी, जिसमें प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (खीक) से जुड़े व्यक्तियों और परिसरों को निशाना बनाया गया, जिस पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (वअढअ) के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर पर भारत सरकार द्वारा कई बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है। सबसे हालिया प्रतिबंध 2019 में कथित राष्ट्र-विरोधी अलगाववादी गतिविधियों और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी समूहों के साथ संबंधों के कारण गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत लगाया गया था। फरवरी 2024 में प्रतिबंध को पाँच साल के लिए और बढ़ा दिया गया था।
जमात-ए-इस्लामी एक इस्लामी आंदोलन है जिसकी स्थापना 1941 में ब्रिटिश भारत में इस्लामी लेखक और सिद्धांतकार सैयद अबुल आला मौदूदी ने की थी। 1947 में भारत के विभाजन के बाद, यह आंदोलन दो स्वतंत्र संगठनों में विभाजित हो गया: पाकिस्तान में ‘जमात-ए-इस्लामी’ और भारत में ‘जमात-ए-इस्लामी’ हिंद। छापेमारी के विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है। प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (खीक) के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बीच अनंतनाग पुलिस ने 12 नवंबर को भी जिले में समन्वित छापेमारी की थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जाँच एजेंसी (एसआईए) की एक टीम ने 20 नवंबर को जम्मू स्थित कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर भी छापा मारा।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने जाँच एजेंसियों से कहा कि वे छापेमारी के लिए मीडिया संस्थानों को चुन-चुनकर न करें और प्रेस पर कोई दबाव न डाला जाए। सुरिंदर चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, “एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं। अगर छापेमारी करनी ही है, तो उसे चुन-चुनकर नहीं किया जाना चाहिए। अगर उन्होंने कुछ गलत किया है, तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ़ दबाव बनाने के लिए नहीं। प्रेस चौथा स्तंभ है और उसे पत्रकारिता करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। कश्मीर टाइम्स की स्थापना 1954 में अनुराधा भसीन के पिता वेद भसीन ने जम्मू-कश्मीर के सबसे पुराने अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र के रूप में की थी।

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