मथुरा

बरसाना की हुरियारिनें लाठियों को पिला रहीं तेल

सोलह शृंगार संग दिखा अलग तेवर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। बरसाना में ठामार होली को लेकर हुरियारिनें खानपान में अनुशासन अपना रही हैं। शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए सुबह-शाम दूध, घी, मक्खन, केसर, बादाम और काजू जैसे पौष्टिक पदार्थों का नियमित सेवन किया जा रहा है। हुरियारिनों का कहना है कि लठामार होली में केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि मन की एकाग्रता और धैर्य भी जरूरी होता है। लठामार होली में भाग लेने वाली हुरियारिनें ब्राह्मण समाज की बहुएं होती हैं। सालभर सामान्य घरेलू जीवन जीने वाली इन महिलाओं में लठामार होली के समय अलग ही आत्मविश्वास और तेज दिखाई देता है। उम्र, स्वास्थ्य या अन्य घरेलू जिम्मेदारियां इस दिन कभी आड़े नहीं आतीं। लठामार होली से पहले हुरियारिनों के बीच सोलह शृंगार की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। पारंपरिक परिधान, आभूषण और शृंगार सामग्री सहेजी जा रही है। हुरियारिनों का मानना है कि लठामार होली में लाठी और शृंगार दोनों साथ चलते हैं। यही राधारानी की सहचरी के रूप में उनकी पहचान है। लठामार होली की खुमारी में डूबे बरसाना में हुरियारिनों की तैयारी अब अंतिम रूप में है। हुरियारिन सावित्री गोस्वामी का कहना है कि लठामार होली उनके लिए साधना जैसा दिन होता है और लठ चलाते समय थकान का एहसास नहीं होता। बीना गोस्वामी बताती हैं कि इस परंपरा का हिस्सा बनना सौभाग्य की बात है। इसके लिए मन और शरीर दोनों को तैयार किया जाता है। सरोज गोस्वामी ने बताया कि लठामार होली भक्ति और अनुशासन का रूप है, जिसमें मन पूरी तरह राधारानी को समर्पित रहता है। पूजा गोस्वामी कहती हैं कि सालभर इसी दिन का इंतजार रहता है, इसलिए तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button