बागपत
त्योहारों के सीजन में नकली खोवा बन सकता है जानलेवा – सावधान रहें!

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत | भारत में त्योहारों का मतलब होता है मिठास, उत्साह और परंपराओं का संगम। हर पर्व पर बाजार मिठाइयों से सज जाते हैं और लोग एक-दूसरे को मिठाइयों से मुंह मीठा कराते हैं। लेकिन इस मिठास के पीछे छिपा एक खतरनाक सच भी है – नकली खोवा (मावा)।
त्योहारों के आते ही मिठाई की मांग अचानक बढ़ जाती है, और इसी मांग का फायदा उठाकर कुछ लालची व्यापारी और मिलावटखोर नकली खोवा तैयार कर बाजार में उतार देते हैं, जो न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या होता है नकली खोवा?
खोवा (या मावा) दूध को गाढ़ा करके तैयार किया जाता है, जो मिठाइयों का मुख्य घटक होता है। लेकिन नकली खोवा बनाने के लिए सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, स्टार्च, यूरिया, रिफाइंड तेल, और यहां तक कि सफेद पेंट तक का इस्तेमाल किया जाता है। यह दिखने में असली खोवे जैसा लगता है, लेकिन इसके सेवन से शरीर में ज़हर फैल सकता है।
स्वास्थ्य पर असर:
नकली खोवा खाने से हो सकते हैं ये गंभीर परिणाम:
फूड पॉयजनिंग
लिवर और किडनी पर असर
दस्त, उल्टी, पेट दर्द
त्वचा पर एलर्जी और खुजली
बच्चों और बुजुर्गों में इम्यून सिस्टम कमजोर होना
दीर्घकालिक प्रभाव: कैंसर जैसे रोगों की संभावना तक
कैसे पहचानें असली और नकली खोवा?
1. रंग: असली खोवा का रंग हल्का पीला या मलाई जैसा होता है, जबकि नकली खोवा ज्यादा सफेद या चमकीला हो सकता है।
2. गंध: असली खोवा में हल्की दूधिया सुगंध आती है, नकली में गंध कृत्रिम या केमिकल जैसी होती है।
3. स्पर्श: असली खोवा नरम और चिकना होता है, नकली खोवा रबड़ी जैसा सख्त या चिपचिपा हो सकता है।
4. आग पर परीक्षण: थोड़ा-सा खोवा गर्म करके देखें, असली खोवा जलने पर हल्की महक देता है, नकली में केमिकल की बदबू आती है।
5. स्टार्च टेस्ट: एक चम्मच खोवा में आयोडीन की कुछ बूंदें डालें, अगर रंग नीला हो गया तो उसमें स्टार्च मिलाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी:
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग ने त्योहारों से पहले छापेमारी बढ़ा दी है और मिठाई की दुकानों से सैंपल लेकर जांच की जा रही है। लोगों को भी सजग रहने और गली-नुक्कड़ की सस्ती दुकानों से खोवा या मिठाई न खरीदने की सलाह दी जा रही है।
सावधानी ही सुरक्षा है:
मिठाई खरीदते समय प्रतिष्ठित दुकानों से ही खरीदें।
खुले में बिक रही मिठाइयों से बचें।
पैक्ड मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें।
खोवा घर पर भी दूध से बना सकते हैं, जो सबसे सुरक्षित विकल्प है।
त्योहार मनाएं, लेकिन सतर्क रहकर
त्योहारों की मिठास में कहीं ज़हर न घुल जाए, इसलिए ज़िम्मेदार उपभोक्ता बनें। स्वास्थ्य सबसे बड़ा त्योहार है — उसे सुरक्षित रखें। खोवा के क्षेत्र में दिल्ली में सबसे बड़ा शुद्धता का प्रतीक माना जाता है गुलाबसिंह शिकोहपुर उत्तर प्रदेश का खोवा।



