गोड्डा
शहरी क्षेत्र में मात्र 11 घंटे मिल रही बिजली

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच आम आदमी की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगड़ गए हैं। एक तरफ पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली की भारी लोड शेडिंग और रसोई गैस की किल्लत ने जनता की कमर तोड़ दी है। उपभोक्ताओं को 24 घंटे में से केवल 11 से 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। आलम यह है कि दिन भर की उमस के बाद रात में भी चैन की नींद नसीब नहीं हो रही है। बिजली विभाग भले ही गोड्डा शहर में पांच फीडरों के माध्यम से निर्बाध बिजली आपूर्ति के दावे कर रहा हो, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें दिन भर में मात्र 18 से 19 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। अघोषित कटौती का कोई निश्चित समय नहीं है, जिससे घरेलू कामकाज के साथ-साथ वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले पेशेवरों और छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। केवल कटौती ही नहीं, बल्कि लो-वोल्टेज की समस्या ने आग में घी डालने का काम किया है। वोल्टेज कम होने के कारण कूलर और एयर कंडीशनर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। कई इलाकों में लोड बढ़ने की वजह से ट्रांसफार्मर फूंकने और केबल जलने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं, जिन्हें ठीक करने में बिजली कर्मचारियों को घंटों लग रहे है। एक ओर जहां बिजली विभाग ओवरलोडिंग का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहा है, वहीं गैस एजेंसियां सप्लाई की कमी की बात कह रही हैं। इस दोहरी मार से जनता के बीच भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही बिजली और गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। बिजली और गैस का यह संकट केवल असुविधा नहीं, बल्कि अब लोगों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी सीधा प्रहार कर रहा है। प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इधर, वर्तमान में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत देखी जा रही है। गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बाद भी लोगों को समय पर रिफिल नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग के कई दिनों बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। सबसे विकट समस्या छोटे सिलेंडर का उपयोग करने वाले कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को हो रही है। ऐसे छात्र छात्राओं को खुदरा गैस बेचने वाले दुकानदारों के चक्कर काटते देखे जा सकते हैं। दुकानदार भी अवैध रूप से रसोई गैस 180 – 200 प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। जब गैस खत्म होती थी, तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इंडक्शन चूल्हा या इलेक्ट्रिक हीटर एक बड़ा सहारा होता था। लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति ने इस विकल्प को भी छीन लिया है। एक स्थानीय गृहिणी विमला देवी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि गैस सिलेंडर मिल नहीं रहा और बिजली का कोई ठिकाना नहीं है। हम इंडक्शन पर खाना बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जैसे ही खाना चढ़ाते हैं, बिजली कट जाती है। दोपहर और रात का खाना समय पर नसीब नहीं हो रहा है, बच्चों और बुजुर्गों को भूखा बैठना पड़ता है। बिजली विभाग द्वारा की जा रही 5 से 6 घंटे की अघोषित कटौती मुख्य रूप से दोपहर और रात के खाने के समय हो रही है। इससे उन परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है जो पूरी तरह बिजली के उपकरणों पर निर्भर हो चुके थे।



