बरेली
श्रीमद भागवत कथा का सप्तम दिवस पर सुदामा चरित्र के साथ कथा का विश्राम हुआ

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली : श्री हरि मंदिर मॉडल टाऊन में आज 01 जून को परम पूज्य राष्ट्रीय संत श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज ने सप्तम दिवस श्रीमद् भागवत कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन किया। सुदामा बड़े गरीब ब्राह्मण थे फिर भी खुश रहते भजन करते रहते कृष्णा गोविंद गोविंद नारायण मनुष्य को जीवन जीने के लिए बड़ी-बड़ी कठिनाइयां आती हैं परेशानियां आती हैं शुद्ध जीवन का आरंभ होता है शुद्ध धन से सुदामा इतनी गरीबी में भी शांत थे। बुढ़ापा आया एक दिन पत्नी ने कहा नाथ एक बार आप द्वारिका होकर आए तो कैसा होता, सुशीला कहती है मुझे चिंता होती है घर में कुछ भी नहीं है यदि आप द्वारिका होकर आओ तो वापसी आने पर द्वारकाधीश कुछ ना कुछ देकर भेजेंगे। सुदामा ने कहा सुशीला मैंने प्रेम किया है कुछ पाने के लिए नहीं । मैं नहीं जाऊंगा दो दिन बाद फिर कहा 2 दिन बाद फिर कहा इस बार सुशील ने सुदामा जी से प्रार्थना की आप जाकर आओ कुछ मांगना मत । सुदामा के मन में विचार आया कि मित्र मेरी पत्नी के हृदय में बैठकर कह रहे हैं , कृष्ण को मेरी याद आई आई होगी, हाथ से माला छूट गई मित्र से मिलने की लालसा सुदामा जी चले गए। सुदामा जी आनंद मुद्रा में है । सुदामा जी ने कृष्णा कुछ ना मांगा ना कृष्णा कुछ दिया। उनके मन में यह विचार कुछ नहीं आया कि कुछ नहीं दिया । कन्हैया के प्रेम भक्ति है प्रेम हो तो कन्हैया जैसा मेरा नाम सुनते ही दौड़ा आया मुझे आलिंगन किया मुझे अपने पलंग पर बिठाया सुदामा को भगवान की केवल कृपा दिखती है। भगवान ने कुछ नहीं दिया इसका कोई इसमें भी कोई अच्छा ही होगी कोई मुझसे न ले,इसलिए कुछ नहीं दिया। उत्तम वक्त घटनाओं से ही प्रभु की कृपा खोज लेते हैं इसमें प्रभु की कृपा होती है।अरुण कुमार वन एवं पर्यावरण मंत्री भारत सरकार,दिग्विजय सिंह शक्स,श्रुति गंगवार ने भी महाराज जी के कथा में पहुंच कर आशीर्वाद प्राप्त किया और कथा का श्रवण भी किया।


