संभल में हज़रत अब्बास की शहादत पर निकाला गया ऐतिहासिक अलम का जुलूस

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
संभल : कर्बला में शहीद हुए नवासा ए रसूल, शहजादा मौला ए कायनात हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत 07 मोहर्रम का तारीखी जुलूस शहर में निकाला गया।
मंगलवार मण्डी किशन दास सराय वा चमन सराय से परंपरागत अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कर्बला में शहीद हुए पैगंबर हज़रत मुहम्मद के नवासे और हज़रत अली के बेटे हज़रत अब्बास (गाज़ी) की याद में निकाला गया जिसमें हज़ारों की तादात में अकीदतमंद व अज़ादार जियारत करने के लिए उमड़े। अलम का जुलूस मियां सराय से शुरू हुआ और आसपास के मोहल्ले के अलम के साथ चमन सराय चौक इमामबाड़े पर जमा हुआ।
यहां मंडी किशनदास सराय, हुसैन खान सराय अली सराय, आलम सराय, शेर खां सराय, सैफ खां, नूरियों सराय, बेगम सराय, जगत के अलम का जुलूस एक विशाल जुलूस के रूप में बाजार सब्जी मंडी से तहसील मोहल्ले के अलम को लेता हुआ कोट गर्वी में जमा हुआ। यहां फतेह उल्ला सराय, देहली दरवाजा, महमूद के अलम जुलूसों के विशाल जुलूस में परिवर्तित होकर रेतला मैदान पहुंचा। यहां से महमूद खां सराय नखासा और ख़ग्गू सराय, अंजुमन तिराहे से दीपा सराय और चोक व तीमारदास सराय के आसपास के मोहल्लों से अपने इमाम बारगाहों की तरफ कूच किया। अलमदारों व आजादारों की ज़बान पर पर मौला अब्बास, मौला हुसैन जिंदाबाद की सदाएं गूंजती हुई माहौल को रूहानी बनाकर हुसैनियत का बोल बाला करते हुए नज़र आए। इमाम बारगाहों में सुबह से ही अलम सजाकर रखे गए थे। दोपहर के समय अलामदारी का सिलसिला शुरू होकर देर शाम खत्म हुआ। यह अलमदारी शिया सुन्नी इत्तेहाद की तारीख को कायम करती हुई नजर आई। जहां शिया समुदाय के लोगों ने हज़रत अब्बास का अलम थामकर ज़िक्र ए हुसैन बुलंद किया और कर्बला के शहीदों को सलाम पेश किया तो वहीं सुन्नी समुदाय के लोगों ने भी अपने हाथों में मौला अब्बास का अलम थामकर कर्बला के शहीदों को याद करते हुए इस्लाम के लिए दी है नबी के घराने की इस कुर्बानी को तरो ताज़ा कर मोहब्बत कर्बला का पैगाम आम किया। यजीद के खिलाफ हुसैनियत का बोल बाला रहा। अलमदारों व आजादारों की सरपरस्ती करने के लिए अपने अपने मोहल्ले के जिम्मेदार अपनी ड्यूटी को परम्परागत तरीके से निभाते हुए नज़र आए। कहीं दस्तारबंदी कर स्थानीय लोगों ने अलम जुलूस में शामिल अलमदारों, अजादारों की हौंसला अफजाई पगड़ी बांधकर की तो कहीं शर्बत और नियाज़ नज़र का एहतिमाम स्टॉल लगाकर किया। जगह जगह पुलिस सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए शांति पूर्ण तरीके से अलम का जुलूस निकाला गया। आला अफसरान पल पल की रिपोर्ट लेते रहे तो स्थानीय अधिकारी पुलिस बल के साथ भ्रमण करते रहे। इस मौके पर रफीक रही, मोहम्मद उमर, फैसल कसीर, हकीम अशीर, समद अब्बास, जमशेद वारसी, सालिम अशरफी आदि शामिल रहे। उधर कोट गर्वी से परंपरागत अलम घरों से उठे और एक जुलूस की शक्ल में शाही जामा मस्जिद मार्ग होते हुए डाक खाना रोड से चक्की के पाट के निकट मोड़ पर बड़े जुलूस में शामिल हुए।




