हजारीबाग

विधायक प्रदीप प्रसाद ने हाथी हमले में हुई मौतों पर जताया गहरा शोक

वन विभाग की लापरवाही पर कड़ा आक्रोश।

पीड़ित परिवारों को अविलंब मुआवजा, स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही तय करने की माँग।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

हजारीबाग सदर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कटकमदाग प्रखंड के नवादा पंचायत स्थित ग्राम बनहा निवासी माथुर गोप जी के सुपुत्र स्वर्गीय गणेश गोप (उम्र 56 वर्ष) का हाथी के हमले में आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद, पीड़ादायक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। इस हृदयविदारक घटना की सूचना प्राप्त होते ही विधायक प्रदीप प्रसाद गाँव पहुँचे, शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। बीते दिनों सदर प्रखंड के चुटयारो निवासी आदित्य राणा की भी हाथी के कुचलने से दर्दनाक मृत्यु हो चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले में वन विभाग पूरी तरह विफल और लापरवाह सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहाँ एक ओर वन विभाग छोटे-छोटे मामलों में ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से परेशान करता है, वहीं दूसरी ओर जनसुरक्षा जैसे गंभीर और संवेदनशील विषयों पर उसकी भूमिका पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई देती है। प्रदीप प्रसाद ने वन विभाग से माँग की कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से नियमित गश्ती व्यवस्था, पूर्व चेतावनी प्रणाली, निगरानी तंत्र एवं ग्रामीणों को सतर्क करने की ठोस कार्ययोजना लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विभाग अपनी नियमसंगत जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता और इन घटनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा कर दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वर्गीय गणेश गोप एवं आदित्य राणा के परिजनों को अविलंब नियमानुसार मुआवजा एवं सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि परिवार के भरण-पोषण और भविष्य की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।विधायक प्रदीप प्रसाद ने जानकारी दी कि स्वर्गीय गणेश गोप जी के शरीर को विधिसम्मत पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेजा गया है। इस दुःखद घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं और उन्हें हरसंभव प्रशासनिक, कानूनी एवं मानवीय सहयोग दिलाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं।

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