झारखंड

 हर थाना में जनता दरबार अनिवार्य हो—विजय शंकर नायक ने DGP को भेजा विस्तृत पत्र

Public Darbar should be made mandatory in every police station – Vijay Shankar Nayak sent a detailed letter to the DGP

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड में पुलिस सुधार और नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह- पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने गुरुवार को झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक विस्तृत पत्र ईमेल के माध्यम से भेजा है। पत्र में उन्होंने राज्य की पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा जनता के प्रति थानों को जवाबदेह बनाने की मांग उठाई है। नायक ने कहा कि झारखंड के कई थानों में शिकायत दर्ज कराने, FIR स्वीकार करवाने और त्वरित न्याय पाने में आम नागरिकों—विशेषकर दलित, आदिवासी और मूलवासी समाज को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर पुलिसिया खौफ, भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मनमानी की घटनाएँ न्याय प्रक्रिया को कमजोर कर रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक से निम्नलिखित मांगें की हैं कि राज्य के सभी जिलों के थाना क्षेत्रों में SP द्वारा नियमित जनता दरबार आयोजित किए जाए। जनता दरबार की तिथि, समय और सूचना सार्वजनिक की जाए, ताकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोग अपनी शिकायतें सीधे वरिष्ठ अधिकारी तक पहुँचा सकें। थानों में देरी, भ्रष्टाचार, बदसलूकी या मनमानी की स्थिति पाए जाने पर SP स्तर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए । जनता दरबार में उठाए गए मुद्दों की मासिक समीक्षा SP कार्यालय में की जाए, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे। विजय शंकर नायक ने कहा कि जनता से संवाद बढ़ेगा, भ्रष्टाचार टूटेगा और पुलिस का भय समाप्त होगा। पुलिस को मजबूत बनाने का एक ही तरीका है, जनता को सुरक्षित और सशक्त महसूस कराना। उन्होंने कहा कि थाना जनता के अधिकारों का पहला द्वार होता है। यदि वही भ्रष्टाचार या भय का केंद्र बन जाए तो लोकतंत्र कमजोर पड़ जाता है। इसलिए जनता दरबार की व्यवस्था को बिना किसी विलंब के लागू करना आवश्यक है। नायक ने यह विस्तृत पत्र पुलिस महानिदेशक के आधिकारिक ई-मेल— dgp@jhpolice.gov.in तथा dgpjharkhand@gmail.com पर भेजा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो झारखंड की पुलिस प्रणाली अधिक संवेदनशील, पारदर्शी, विश्वासयोग्य और भ्रष्टाचार-मुक्त बन सकती है।
समेत छात्रा उपस्थित रही।

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