
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। मां अगर ठान ले तो मौत को भी मात दे सकती है इस कहावत को बरेली में सच कर दिखाया गया। 62 वर्षीय मां ने अपने 35 वर्षीय बेटे को किडनी दान कर न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि पूरे समाज के सामने मातृत्व, साहस और बलिदान की मिसाल पेश कर दी। उत्तराखंड के नैनीताल निवासी गंभीर रूप से बीमार युवक (काल्पनिक नाम सुरेश) का किडनी प्रत्यारोपण बरेली के साई सुखदा हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक किया गया।
युवक लंबे समय से दोनों किडनियों के फेल होने से जूझ रहा था। डायलिसिस पर जीवन टिका हुआ था, हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे थे। ऐसे में जब डॉक्टरों ने साफ कहा कि प्रत्यारोपण ही आखिरी रास्ता है, तब मां (काल्पनिक नाम केला देवी) ने बिना एक पल सोचे अपना अंग दान करने का फैसला कर लिया। कई घंटे चली हाई रिस्क सर्जरी के बाद जैसे ही नई किडनी ने काम शुरू किया, अस्पताल में खुशी की लहर दौड़ गई।
खास बात यह रही कि यह जीवन रक्षक प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया, जिससे साई सुखदा हॉस्पिटल बरेली का पहला निजी अस्पताल बन गया जहां यह सुविधा मिली। डॉक्टरों ने इसे बरेली के चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि अब किडनी मरीजों को इलाज के लिए महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उम्मीद, विश्वास और मां के त्याग की जीत है।
इस सफल प्रत्यारोपण में डाक्टरों की टीम में डा. शरद अग्रवाल, डा. सीताराम सिंह कुलराज, डा. ऋषि अग्रवाल, डा. धु्रव मोहन, डा. प्रजाय श्रीवास्तव, डा. आशु हिरानी, डा. रोहित सिंघल शामिल रहे।


