गाजियाबाद

लोनी की नई मुसीबत : नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी

पुलिस-आबकारी विभाग की चुप्पी पर गंभीर सवाल, कब टूटेगा संरक्षण का जाल?

युवाओं का भविष्य अंधकार में, पुलिस खामोश
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी ग़ाज़ियाबाद । लोनी क्षेत्र में नशे का कारोबार जड़ों तक फैल चुका है। गली-कूचों से लेकर स्कूल-कॉलेजों तक चरस, गांजा, स्मैक और नशीली दवाइयाँ आसानी से उपलब्ध हैं। हालत यह है कि युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। सवाल यह है कि शिकायतें, सबूत और जनता की आवाज़ के बावजूद पुलिस-आबकारी विभाग चुप क्यों है?
छोटे-छोटे स्टाल, परचून की दुकानें और घरों से हरी-काली पुड़ियों में चरस-गांजा खुलेआम बेचा  जा रहा है। आलम यह है कि युवा सुबह से ही इन ठिकानों के चक्कर लगाने लगते हैं। स्कूल-कॉलेजों के बाहर भी नशे के कारोबारियो के गुर्गे थैले में पुड़िया छिपाकर सप्लाई करते हैं। सूत्र बताते हैं—गांजे की पुड़िया 80 रुपये और चरस की 100 रुपये में 10 ग्राम तक बेची जा रही है। यह सब कुछ कालोनियों में खुलेआम हो रहा है, मगर पुलिस “गांधी जी के तीन बंदरों” की तरह आँख-कान  बंद किए हुए अनजान बनी बैठी है।ऐसा नहीं है कि पुलिस इन मामलो से अनभिज्ञ हो, लेकिन सुविधा शुल्क ने अनजान बन जाने को मजबूर कर दिया है।
शिकायतें आती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती
सेक्युलर इंकलाब पार्टी के नेता प्रमोद गोस्वामी ने लोनी क्षेत्र की कालोनियों में फैलते कारोबार पर रोक लगाने की मांग का ज्ञापन सम्बंधित पुलिस अधिकारियों को दिया इसके अलावा एडवोकेट मोहम्मद अहमद ने लोनी कोतवाली क्षेत्र के अशोक बिहार में प्रतिबंधित दवाइयों और इंजेक्शनों की बिक्री को लेकर लिखित शिकायत दी। इसके बावजूद पुलिस हरकत में नहीं आई। सवाल उठता है कि क्या शिकायत करने वालों की आवाज़ दबा दी गई, या फिर नशे के कारोबारियों को पुलिस का संरक्षण हासिल है?
प्रशासन की निष्क्रियता या मिलीभगत?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिसकर्मी हर महीने मोटी रकम लेकर नशे के अड्डों को संरक्षण देते है जब कभी इस मामले कार्यवाही का दवाव आता है तो नशे के कारोबारियों से जुड़े पुलिस  कर्मी फोन से इन्हें सूचना दे देते हैं और इस धन्धे से जुड़े लोग एकाएक गायब हो जाते है।यही कारण है कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में लाकर खड़ा करती हैं।
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