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तमिल आवाज दबा नहीं पाएंगे

फिल्म बैन को लेकर राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मोदी को सीधी चुनौती

नई दिल्ली : राहुल गांधी ने तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ पर केंद्र की कथित रोक को तमिल संस्कृति पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर तमिल आवाज दबाने का आरोप लगाया है। यह विवाद फिल्म के राजनीतिक विषय और सरकार की आपत्तियों को लेकर सेंसरशिप एवं कलात्मक स्वतंत्रता पर एक बड़ी बहस छेड़ रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा तमिल फिल्म जन नायकन पर रोक लगाने की कथित कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बवाल मच गया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पर तमिल संस्कृति पर हमला करने का आरोप लगाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी है कि तमिल जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मंगलवार को इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने पर सरकार को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा ‘जना नायकन’ पर रोक लगाना तमिल संस्कृति पर हमला है। श्री मोदी, आप तमिल जनता की आवाज को दबाने में कभी सफल नहीं होंगे।
जना नायकन को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कथित तौर पर फिल्म को मंजूरी देने से रोकने या उस पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए। हालांकि केंद्र ने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्तियों का विवरण नहीं दिया है, लेकिन मामले से परिचित सूत्रों का कहना है कि प्रमाणन मानदंडों और विषयवस्तु संबंधी दिशानिदेर्शों को लेकर चिंताएं जताई गई थीं, विशेष रूप से फिल्म के राजनीतिक निहितार्थों और समकालीन शासन व्यवस्था के साथ कथित समानताओं को लेकर।
आधिकारिक तौर पर स्पष्टता की कमी ने अटकलों और आलोचनाओं को हवा दी है, खासकर तमिलनाडु में, जहां सिनेमा ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक विचारों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है। जन नायकन, जिसका अर्थ है “जनता का नेता”, सामाजिक न्याय, राजनीतिक जवाबदेही और जन नेतृत्व पर आधारित अपनी कहानी के कारण रिलीज से पहले ही ध्यान आकर्षित कर चुका था। फिल्म के समर्थकों का तर्क है कि इसके विषय तमिल राजनीतिक इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से मेल खाते हैं।
विपक्षी नेताओं और फिल्म जगत के सदस्यों ने फिल्म पर रोक लगाने के इस कदम को सेंसरशिप करार दिया है और चेतावनी दी है कि यह कलात्मक स्वतंत्रता को कमजोर करता है और भारत के सबसे राजनीतिक रूप से जागरूक फिल्म उद्योगों में से एक में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सीमित करता है। कांग्रेस नेता का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की ओर से यह आलोचना बढ़ रही है कि नियामक तंत्रों का इस्तेमाल राजनीतिक विचारों और असहमति की आवाजों को सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है

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