भरत पुर
अपनाघर आश्रम में निवासित प्रभुओं की सेवा के लिए उमड़ा जनसहयोग
भुसावर अपनाघर सेवा समिति ने की मनावता की मिशाल

भरतपुर अपनाघर आश्रम के लिए 65 कट्टे गेंहू (32 क्विंटल 50 किलो) एक कट्टा नमक की एक बड़ी खेप वाहन में रवाना की
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर : मनावता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है,और इसी संकल्प को चरितार्थ करते हुए भरतपुर जिले के एतिहासिक शहरों में शामिल तहसील भुसावर की पावन धरा से सेवा की एक अनुपम मिशाल पेश की गई।बेसहारा और लावारिसों के एक मात्र संबल “अपनाघर आश्रम” के लिए भुसावर से मदद का कारवां आज 23 मई शनिवार को पूरे उत्साह के साथ रवाना हुआ। जहां अपनाघर सेवा समिति भुसावर के तत्वाधान में उपखण्ड क्षेत्र के दानदाताओं के सहयोग से हजारों किलोग्राम खाध सामग्री एकत्रित कर भरतपुर स्थित मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन भेजी गई,ताकि आश्रम में उपचाराधीन और निवासरत प्रभुओं की सेवा में कोई कमी न रहें। छोकरवाड़ा सड़क मार्ग स्थित गणेश नगर नई अनाज मंडी के प्रांगण से सामग्री रवानगी का दृश्य अत्यंन्त भावुक और प्रेरणादायी रहा। इस कार्यक्रम के दौरान अपना घर सेवा समिति भुसावर के अध्यक्ष राजकुमार बंसल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भरतपुर अपना घर आश्रम उन दीन दुखियों,दिव्यांगों और असहायों का आशियाना है,जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे पुनीत कार्य में समाज के हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार सहभागिता निभानी चाहिए, क्योकि नर सेवा ही नारायण सेवा है। इस नेक कार्य का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आश्रम में रह रहा कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। इस सेवा के अंतर्गत 65 कट्टों में भरा 32 क्विंटल 50 किलोग्राम गेंहू एक कट्टा नमक वाहन के जरिए रवाना किया। खाध सामाग्री से भरे इस वाहन को सत्येन्द्र कुमार सिंघल (कानूनगो) ने हरी झंडी दिखाकर भरतपुर के लिए रवाना किया। वहीं इस गरिमामयी अवसर पर अपनाघर सेवा समिति भुसावर के अध्यक्ष राजकुमार बंसल सचिव शेर सिंह सैनी, वित्त सचिव अरविन्द कुमार बंसल, अशोक सेवक, विष्णु सैन, दलवीर चौधरी, राजेश गोयल, श्रीकिशन, गोविन्द, चन्द्रराम आदि सहित अनेक गणमान्य नागरिकों सहित अनाज मण्डी के व्यापारी उपस्थित रहे। जिन्होंने रवानगी के समय सभी सदस्यों ने सामुहिक रुप से अपनाघर आश्रम में भर्ती असहायों की निरंन्तर सेवा करने का द्रढ संकल्प लिया और समाज में एक जुटता और परोपकार की भावना को भी मजबूत किया।



