जालौन
अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों पर अब होगा निर्णायक प्रहारःडीएम
बगैर स्वीकृत मानचित्र निर्माण करने वालों की जांच में न बरतें कोताही

अभियोजन, विधिक कार्यवाही उपरांत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के निर्देश कोचिंग, अस्पताल, होटल, मैरिज हॉल की सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था की होगी सघन जांच
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। उरई विकास प्राधिकरण क्षेत्र को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं नियोजित स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से जिलाधिकारीध् उपाध्यक्ष उरई विकास प्राधिकरण राजेश कुमार पाण्डेय ने विकास प्राधिकरण सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अनधिकृत निर्माणों, अवैध कॉलोनियों, वाद निस्तारण, नई टाउनशिप तथा विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए सभी निर्माणों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के अनुसार बिधिसम्मत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विकास क्षेत्र में नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विकास क्षेत्र के अंतर्गत संचालित कोचिंग एवं शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, होटलों तथा विवाह गृहों में पार्किंग व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुरक्षा मानकों की विशेष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही मार्ग प्रकाश एवं सड़क निर्माण से संबंधित स्वीकृत निविदाओं के कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने पर विशेष जोर दिया। उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27 के अंतर्गत लंबित वादों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रक्रियाधीन प्रकरणों में शीघ्र शमन मानचित्र प्रस्तुत कराए जाएं तथा जिन मामलों में शमन मानचित्र दाखिल नहीं किया गया है या जहां बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण किए गए हैं, वहां सीलिंग, अभियोजन एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से अमल में लाई जाए। उन्होंने प्राधिकरण की आय में वृद्धि के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कदम उठाने के भी निर्देश दिए, ताकि विकास कार्यों को और गति मिल सके। जिलाधिकारी ने समस्त निर्माणकर्ताओं, विकासकर्ताओं एवं आम नागरिकों से अपील की कि उरई विकास प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा कॉलोनी विकास कार्य बिना मानचित्र स्वीकृत कराए न करें तथा अवैध प्लॉटों का क्रय-विक्रय करने से भी बचें। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध अधिनियम के अंतर्गत सीलिंग, अभियोजन एवं ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित निर्माणकर्ता


