ललितपुर
काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव समापन समारोह का हुआ आयोजन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
काकोरी ट्रेन एक्शन से सम्बंधित चित्र प्रदर्शनी, लघु फिल्म व रंगोली बनी आकर्षण का केन्द्र
देश के वीर सपूतों को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर छात्र-छात्राओं को बताया काकोरी का इतिहास
सेल्फी प्वाइंट पर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने ली सेल्फी
नगर के प्रमुख चौराहों पर निकाली गईं रैलियां
ललितपुर। काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव समापन समारोह पर जिलाधिकारी अमनदीप डुली की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों ने काकोरी से सम्बंधित प्रदर्शनी, रंगोली का अवलोकन कर एक पेड़ मां के नाम की थीम पर वृक्षारोपण किया गया। साथ ही काकोरी शहीद स्मारक लखनऊ में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया। राज्यमंत्री मनोहर लाल, विधायक रामरतन कुशवाहा, पंचायत अध्यक्ष कैलाश नारायण, जिलाध्यक्ष हरीशचन्द्र एवं अमर शहीदों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों मौजूद रहे, जिन्होंने फीता काटकर काकोरी ट्रेन एक्शन से सम्बंधित चित्र प्रदर्शनी का भ्रमण कर छात्राओं ने बनायी रंगोली का अवलोकन किया। सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी भी ली। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धासुमन अप्रित करते हुए वृक्षारोपण किया। काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित लघु फिल्म के माध्यम से बताया गया कि क्रान्तिकारियों द्वारा चलाए जा रहे स्वतन्त्रता के आन्दोलन को गति देने के लिये धन की तत्काल व्यवस्था की जरूरत के लिए शाहजहांपुर में हुई बैठक के दौरान राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनायी थी। इस योजनानुसार दल के ही एक प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त 1925 को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन को चेन खींच कर रोका और क्रान्तिकारी पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद व 6 अन्य सहयोगियों की सहायता से समूची लौह पथ गामिनी पर धावा बोलते हुए सरकारी खजाना लूट लिया। बाद में अंग्रेजी सत्ता उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के कुल 40 क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेडऩे, सरकारी खजाना लूटने व यात्रियों की हत्या करने का प्रकरण चलाया जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां तथा ठाकुर रोशन सिंह को मृत्यु-दण्ड (फांसी की सजा) सुनायी गयी। इस प्रकरण में 16 अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम 4 वर्ष की सजा से लेकर अधिकतम काला पानी (आजीवन कारावास) तक का दण्ड दिया गया था। इस दौरान सीडीओ शेषनाथ चौहान, एडीएम अंकुर श्रीवास्तव, डीसी मनरेगा रमेश कुमार, डीडीओ अतिरंजन सिंह, डीपीआरओ कुंवरसिंह यादव, डीआईओएस ओपी सिंह, डीआईओ, डीएसओ उमेश मिश्रा, पर्यटक अधिकारी हेमलता, सदस्य, जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद पर्यटन मित्र फिरोज डायमंड आदि उपस्थित रहे।