सिंगरौली
मजौना रेत खदान में निरीक्षण बेअसर, सीमांकन के कुछ घंटे बाद ही फिर शुरू हुआ अवैध उत्खनन
महान नदी की बीचधार में पॉकलेन-जेसीबी उतरीं, NGT नियमों की खुलेआम धज्जियां; माइनिंग-राजस्व विभाग मौन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जियावन थाना क्षेत्र स्थित मजौना रेत खदान में अवैध उत्खनन अब प्रशासनिक कार्रवाई पर खुली चुनौती बन चुका है। माइनिंग विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण और सीमांकन किए जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि सीमांकन के महज कुछ ही घंटों बाद महान नदी की मुख्य धारा और बीचधार से फिर खुलेआम रेत निकालने का काम शुरू हो गया, जिससे विभागीय कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीमांकन के बाद भी मशीनें नदी में, NGT आदेशों की अनदेखी
प्राप्त जानकारी के अनुसार माइनिंग एवं राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर खदान का सीमांकन करते हुए नियमों के पालन की हिदायत दी थी। लेकिन इसके तुरंत बाद नदी में रास्ता बनाकर पॉकलेन, पीसी मशीन और जेसीबी को सीधे महान नदी की सक्रिय धारा में उतार दिया गया। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि नदी के भीतर भारी मशीनों से रेत निकाली जा रही है, जो कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
दिन-रात जारी अवैध कारोबार, प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन दिन और रात दोनों समय बेरोकटोक चल रहा है। रात होते ही खदान क्षेत्र में भारी मशीनों की आवाजें गूंजने लगती हैं और रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व डंपर सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न माइनिंग विभाग, न राजस्व विभाग और न ही पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है।
ओवरलोड वाहनों से सड़कें जर्जर, बढ़ा हादसों का खतरा
अवैध रूप से निकाली गई रेत को ओवरलोड वाहनों से ढोया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की ग्रामीण सड़कें तेजी से टूट रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और आम नागरिकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थायी दबंग के प्रभाव में सिस्टम? विभाग क्यों बेबस
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सहकार ग्लोबल कंपनी के लिए लोडिंग कार्य संभालने वाला एक स्थानीय स्थायी दबंग इतना प्रभावशाली है कि उसके सामने माइनिंग, राजस्व और पुलिस विभाग भी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह कौन सा संरक्षण है, जिसके चलते NGT नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ने के बावजूद विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि लगातार हो रहे अवैध खनन से महान नदी का अस्तित्व खतरे में है, जिससे पर्यावरण और जनजीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
जब माइनिंग और राजस्व विभाग के सीमांकन के बाद भी महान नदी की बीचधार से रेत निकाली जा रही है, तो जिम्मेदार विभाग कब तक चुप रहेंगे? NGT आदेशों के उल्लंघन पर कब होगी ठोस कार्रवाई? क्या दबंग के आगे सिस्टम नतमस्तक हो चुका है?



