बागपत

जनपद बागपत के सजग कवि – इक़बाल सिंह

कलम के माध्यम से समाज को जगाने वाले सक्रिय रचनाकार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। जनपद बागपत की मिट्टी हमेशा से प्रतिभाओं से भरी रही है। इन्हीं में एक नाम है कवि इक़बाल सिंह का, जो अपने शब्दों और विचारों से न केवल साहित्य जगत में पहचान रखते हैं, बल्कि समाज और किसानों की आवाज़ भी बने हुए हैं।
कवि इक़बाल सिंह का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे किसान यूनियन से जुड़े रहे, लेकिन राजनीति की भूख कभी उन्हें छू भी नहीं सकी। सत्ता या पद उनके लिए आकर्षण नहीं रहे। उनका असली ध्येय रहा – जनता और सरकार को उनके लेखन और कविताओं के माध्यम से जगाना।
सामाजिक चेतना के अग्रदूत
बड़ौत के आजाद नगर में निवास करने वाले कवि इक़बाल सिंह हमेशा सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहे हैं। वे समस्याओं पर केवल चर्चा ही नहीं करते, बल्कि अपनी रचनाओं के माध्यम से जनता के बीच जागरूकता भी फैलाते हैं। यही कारण है कि उनके गीत और पद सिर्फ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि सजगता का संदेश होते हैं।
रचनाएँ – जो प्रेरणा देती हैं
कवि इक़बाल सिंह ने वर्षों से अनेक गीत, पद और कविताएँ लिखी हैं। इनमें किसानों की मेहनत, समाज की कुरीतियाँ, देश की चुनौतियाँ और जागरूकता का स्वर प्रमुखता से मिलता है। उनकी लेखनी जनपद बागपत की मिट्टी से जुड़ी हुई है, और यही जुड़ाव उनकी रचनाओं को लोगों के दिलों तक पहुँचाता है।
एक ऐतिहासिक प्रसंग – भाजपा नेताओं से जुड़ाव
कवि इक़बाल सिंह के जीवन का एक खास प्रसंग आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
उन्होंने मंच से तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव को संबोधित कविता प्रति पक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी को सुनाई थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी उनकी ओजस्वी वाणी और प्रभावशाली शब्दों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी जेब से अपना पेन निकालकर कवि को भेंट किया। साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि “कभी कोई समस्या आए तो मिलने अवश्य आना।”
यही प्रसंग कवि इक़बाल सिंह के लिए आजीवन स्मरणीय रहा और इसके बाद से उनका हृदय भाजपा नेताओं के प्रति और भी अधिक जुड़ाव महसूस करने लगा। यही कारण है कि वे आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना आदर्श मानते हैं और उनके प्रशंसक बने हुए हैं।
आज भी सक्रिय
गौर करने वाली बात यह है कि कवि इक़बाल सिंह आज भी सक्रिय हैं। वे निरंतर लिखते हैं, समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाते हैं कि कलम से बड़ा कोई हथियार नहीं।
कवि इक़बाल सिंह का जीवन और लेखनी हमें यह संदेश देते हैं कि साहित्य केवल भावनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि समाज परिवर्तन का एक मजबूत माध्यम भी है। भाजपा नेताओं से उनके संबंध और सम्मानजनक प्रसंग इस बात के गवाह हैं कि उनकी कविताओं की शक्ति कितनी गहरी है। बागपत की यह धरती ऐसे कवि पर गर्व महसूस करती है, जिसकी आवाज़ आज भी समाज और राजनीति दोनों को जागरूक करने में लगी हुई है।
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