गाजियाबाद

गाजियाबाद में पत्रकारों का आरोप

आंदोलन से पहले ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी को घर में रोका गया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
गाजियाबाद : पुलिस उत्पीड़न के विरोध में प्रस्तावित आंदोलन से पहले गाजियाबाद में पत्रकार ललित चौधरी और  अपूर्वा चौधरी को उनके घर में ही हाऊस अरेस्ट करते हुए रोकने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बुधवार सुबह से भारी पुलिस बल उनकी सोसाइटी के बाहर तैनात कर दिया गया, ताकि वे आंदोलन में शामिल न हो सकें।
‘भारत का बदलता शासन’ समाचार पत्र के संपादक ललित चौधरी और पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने इसे प्रशासन की दमनात्मक कार्रवाई बताया है। अपूर्वा चौधरी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आवाज उठाने वालों को लगातार दबाने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि गाजियाबाद के पत्रकारों ने पुलिस के कथित दुर्व्यवहार और कार्रवाई न होने के विरोध में बुधवार, 27 मई से पुलिस कमिश्नर कार्यालय पर अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया था। इसी बीच दोनों पत्रकारों को घर से बाहर न निकलने से रोकने के आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला
विवाद की शुरुआत सिद्धार्थ विहार स्थित जल निगम पुलिस चौकी से जुड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि पत्रकार ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी अपनी सहयोगी महिला पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ हुई कथित अभद्रता की शिकायत दर्ज कराने चौकी पहुंचे थे।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय संपादक ललित चौधरी के साथ मारपीट की। आरोपों में सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल किए गए हैं।
पत्रकारों का यह भी आरोप है कि बाद में थाना विजयनगर के प्रभारी धर्मपाल से शिकायत करने पर भी उन्हें उचित सुनवाई नहीं मिली। मामले की शिकायत एसीपी, डीसीपी और पुलिस कमिश्नर तक पहुंचाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भूख हड़ताल पर बैठीं अपूर्वा चौधरी
न्याय न मिलने से नाराज अपूर्वा चौधरी पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगी।
पत्रकारों में नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गाजियाबाद के पत्रकारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की आवाज को दबाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।आज बड़ी संख्या में पत्रकारों का एक टीम पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलने उनके कार्यालय पर भी पहुंची थी लेकिन पुलिस के आला अधिकारी अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे
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