“जब तक न्याय अधूरा, तब तक लोकतंत्र भी अधूरा”, असम के आदिवासियों को एसटी दर्जा न मिलना राष्ट्रीय अन्याय- हेमंत सोरेन
“As long as justice is incomplete, democracy is also incomplete”, denying ST status to the tribals of Assam is a national injustice – Hemant Soren

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची/असम, 05 अप्रैल 2026 — झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागानों में रहने वाले आदिवासी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा नहीं मिलने के मुद्दे को गंभीर राष्ट्रीय अन्याय करार दिया है। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि असम की धरती पर एक ऐसा सच दबा हुआ है, जिसे जितना बताया जाए उतना कम है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चाय बागानों में रह रहे आदिवासी समुदाय को आज तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाई है, जो केवल एक चूक नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का अन्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों के समय जिन आदिवासियों को उनके घरों से दूर लाकर असम में बसाया गया और जिन्होंने अपने खून-पसीने से राज्य की अर्थव्यवस्था खड़ी की, उन्हें आज तक उनके अस्तित्व की पहचान नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद कई सरकारें बदलीं, लेकिन इस समाज की स्थिति नहीं बदली और कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को प्राथमिकता तक नहीं दी। हेमंत सोरेन ने सवाल उठाया कि आखिर एक पूरे समाज को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित क्यों रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है और यह न्याय, सम्मान व पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार कर उसे दूर किया जाए। मुख्यमंत्री ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा, “जब तक न्याय अधूरा है, तब तक लोकतंत्र भी अधूरा है।”



