हजारीबाग

आँगों पंचायत के पचंडा गांव में पेयजल की संकट, नदी के चूआं से बुझाते हैं प्यास।

100 घर हैं, आबादी 500 है, तीन कुआं में एक कुआं सूखने के कगार पर है दोनों चापाकल कई वर्षों से खराब।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़कागांव प्रखंड से 26 किलोमीटर दूर आंगों पंचायत स्थित पचंदा गांव के ग्रामीण पेयजल संकट की समस्या से जूझ रहे हैं। गर्मी के दिनों में यह समस्या पहली बार नहीं है बल्कि विगत 40- 50 वर्षों से निरंतर चला आ रहा है। जब भी गर्मी के दिन आती हैं तब गांव में पेयजल की समस्या उभरने लगती है। कुछ वर्ष पूर्व गांव में समाजसेवी कोलेश्वर गंझु के प्रयास से गांव में 2 चापाकल लगवाए गए थे। परंतु दोनों चापाकल खराब पड़े हैं दोनों चापाकल 3 वर्षों से खराब है। पानी के किल्लत के कारण महिलाओं को नदी की तरफ रुख करना पड़ता है। तब कहीं जाकर घर में खाना पकता है ,प्याज बुझती है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पिंडरा टोला में एक कुआं ऊपर टोला में एक कुआं एवं बीच टोला में एक कुआं है कुल तीन कुआं है जिसमें बीच टोला के  कुआं सूखने के कगार पर है। बताते चलें कि पचंडा गांव में लगभग 100 घर हैं जिसमें 4:30 सौ से लेकर 500 लोग निवास करते हैं। आजादी के बाद से पचंडा नदी पर पुल नहीं रहने के कारण लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पुल की समस्या को देखते हुए कोलेश्वर गंझु के प्रयास से सरकार के द्वारा पिछले वर्ष से पुल का निर्माण भी कराया जा रहा है। जिससे विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को काफी लाभ मिलेगा ,गांव का विकास होगा। गर्मी के दिनों में हम लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है- ग्रामीण पचंडा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग को पानी की समस्या की संकट से हमेशा जूझना पड़ता है । जागरूकता की कमी रहने के कारण हम लोग शिकायत नहीं कर पाते हैं। स्वच्छता एवं पेयजल विभाग को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ताकि हम लोगों की पानी की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाए। पीएचडी विभाग को समस्या दूर करने के लिए भेजेंगे-बीडीओ बड़कागांव बीडीओ जितेंद्र कुमार मंडल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कहा कि पीएचडी विभाग को वहां भेजेंगे,हैंड पंप अगर खराब होगा तो तुरंत उसे बनवा दिया जाएगा।
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