हजारीबाग
गो-तस्करी सिंडिकेट’ जीटी रोड से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक फैला जाल।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग और जीटी रोड (GT Road) के इलाके इन दिनों गो-तस्करी के एक बेहद हाई-प्रोफाइल और दुस्साहसिक सिंडिकेट के गढ़ बन चुके हैं। यह मामला सिर्फ पशुओं की अवैध ढुलाई का नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक रसूख और करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हो रहा है, जिसने कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दे दी है। हाल के दिनों में इस धंधे से जुड़े सरगनाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम सत्ता और सरकार की धौंस दिखाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस सिंडिकेट से जुड़े गौ-तस्करों और उनके गुर्गों में कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। तस्करों के बीच कथित तौर पर यह बात आम हो चुकी है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के रहते कोई भी उनके इस काले कारोबार पर आंच नहीं आने दे सकता। इस तरह के दावों ने न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि विपक्ष को भी सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका प्रशासनिक गलियारों से जुड़ा होना बताया जा रहा है। सूत्रों और आरोपों की मानें तो इस सिंडिकेट की कमान कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष गलियारों में पैठ रखने वाले लोग संभाल रहे हैं।
आरोप है कि हजारीबाग का कुख्यात गो-तस्करी माफिया ए खान इस पूरे धंधे का मुख्य मास्टरमाइंड है। ए खान का सगा भांजा, बताया जा रहा है, कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करता है। आरोप है कि वहीं से बैठकर इस पूरे सिंडिकेट के लिए सुरक्षा कवच तैयार करता है और पुलिसिया कार्रवाई की हर भनक पहले ही तस्करों तक पहुंचा देता है। बंगाल बंद हुआ तो झारखंड बना नया ‘सॉफ्ट टारगेट’ हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल की सीमा पर सख्ती बढ़ने और रूट पूरी तरह से ब्लॉक होने के बाद, माफिया ए खान ने अपना पूरा ध्यान झारखंड की ओर केंद्रित कर दिया है। अब हजारीबाग, रांची और धनबाद की सड़कों पर देर रात गो-तस्करी की गाड़ियों की रफ्तार तेज हो गई है। जीटी रोड पर ए खान का पूरा साम्राज्य फैला हुआ है, जहां उसके गुर्गे हर चौक-चौराहे पर नजर रखते हैं। बरही बॉर्डर पर मजहर कुरैशी की ‘लाइजनिंग करता है। इस सिंडिकेट का सबसे महत्वपूर्ण जमीनी सिपहसालार बरही का मजहर कुरैशी बताया जाता है। मजहर कुरैशी का काम झारखंड की सीमा पर खड़े होकर गो-तस्करों की गाड़ियों को बिना किसी रोक-टोक के पार कराना है। स्थानीय स्तर पर सेटिंग और लाइजनिंग के दम पर मजहर कुरैशी इन गाड़ियों को बेखौफ होकर बॉर्डर पार कराता है। अब देखना है कि प्रशासन क्या कदम उठते हैं गो तस्करी रोकने के लिए।



